भोजन अन्न ब्रह्म
हरिर्दाता हरिर्भोक्ता हरिर्अन्नं प्रजापतिः l
हरिर्विप्रशरीरस्तु भुंक्ते भोजयते हरि: ll
{ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: }
भावार्थ :- हे प्रभु ! सब प्रकार के भोजनों के दाता आप ही हैं और आप ही उसे ग्रहण करने वाले हैं l हे प्रभु ! आप स्वयं ही अन्न हैं l मनुष्य के शरीर में भगवान स्वयं ही भोजन ग्रहण करने वाले तथा भोजन कराने वाले हैं l हे प्रभु ! सब कुछ तेरा ही है और तुझको ही समर्पित है l
