दिव्य सन्देश

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When you have faith in God, you don't have to worry about the future. You just know it's all in His hands. You just go to and do your best.

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जन्म दिवस

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माताजी जन्मदिन को विशेष महत्व दिया करती थीं, इस अवसर को ‘बॉन फेत’ कहा जाता है । आशीर्वाद के साथ-साथ माताजी कुछ लोगों को छोटा-मोटा लिखित संदेश भी देती थीं ।

जन्मदिन

मानव के अन्दर भागवत शक्ति और कृपा के अवतरण का दिव्य दिवस

जन्मदिन का आध्यात्मिक महत्व

जन्मदिन अर्थात् मानव देह का धरती को प्रथम स्पर्श दिन ।जन्मदिन अर्थात् परम प्रभु की इच्छा एवं असीम कृपा सेधरती पर एक शरीरधारी आत्मा का शुभागमन दिवस।अपनी सारी सत्ता को अपनी उच्चतम चेतना के चारों ओर एकत्रित करो तथाअपने मन को बेतरतीबी से काम न करने दो।सन्देह ऐसा खेल नहीं है जिसमें मजा लिया जाये,यह ऐसा विष है जो बूंद-बूंद कर तुम्हारी आत्मा का क्षय करता है।परम चेतना को छोड़कर कोई और चेतना नहीं है।परम संकल्प को छोड़कर कोई और संकल्प नहीं है।परम जीवन को छोड़कर कोई और जीवन नहीं है।परम व्यक्तित्व को छोड़कर कोई और व्यक्तित्व नहीं है।

बस ‘एक’ और ‘सर्व’।

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शुभ-जन्मदिन शुभकामना

श्रीमाँ  ने जन्मदिन को विशेष महत्व दिया है । श्रीमाँ  कहती है- जन्मदिन सचमुच में मनुष्य के जीवन में एक विशेष दिन होता है । यह वर्ष के उन दिनों में से एक है जब परम् पुरुष हमारे अंदर उतरते हैं  – जब हम शाश्वत के साथ आमने-सामने होते हैं – यह उन दिनों में से एक है जब हमारी अंतरात्मा शाश्वत के साथ संपर्क में आती है और अगर हम जरा भी सचेतन रहें तो हम अपने अंदर उनकी उपस्थिति का अनुभव कर सकते हैं । अगर हम जरा-सा प्रयास करें तो हम बिजली की कौंध की तरह एक क्षण में कई जीवनों का काम पूरा कर सकते हैं । इसीलिये श्रीमाँ  जन्मदिन को इतना अधिक महत्व देती है, क्योंकि इस दिन हम जो प्रगति कर सकते हैं वह सचमुच में अतुलनीय है ।

आदिशक्ति माँ  भगवती स्वयं भी हमारी चेतना को जरा ऊपर की ओर खोलने के लिये कार्य करती है ताकि हम शाश्वत के सामने आ सके ।

श्री माँ  कहती है मेरे बालक,  यह बहुत विशेष दिन है । एक ऐसा दिन है जब तुम ‘परम् चेतना’ के साथ एक हो सकते हो । इस दिन भगवान् हमें उच्चतम संभव क्षेत्र तक उठाते हैं ताकि हमारी आत्मा, जो उस शाश्वत ज्वाला का अंश है, अपने मूल के साथ एकाकार होकर उसी के समान ज्योतिर्मय बन सकें ।

वस्तुतः यह दिन जीवन का एक महान् अवसर है । व्यक्ति इस दिन इतना खुला हुआ और ग्रहणशील होता है कि उसे जो कुछ दिया जाये उस सबको आत्मसात् कर सकता है । यह उन दिनों में से एक है जब स्वयं प्रभु हमारे लिये द्वारों को पूरी तरह खोल देते हैं,  यह ऐसा है मानो वह हमें निमंत्रण देते हों कि हम अभीप्सा की ज्वाला को फिर से अधिक शक्तिशाली रूप से प्रज्जवलित करें । यह उन दिनों में से एक है जो परम प्रभु स्वयं हमें प्रदान करते हैं ।

जिसे हम भी अपने व्यक्तिगत प्रयास द्वारा कर सकते हैं, किंतु इसमें समय अधिक लगेगा और यह इतना आसान नहीं, कठिन और लंबा होगा । जन्मदिन एक वास्तविक शुभ अवसर ‘कृपा’ का दिन है। यह एक गूढ़ आध्यात्मिक घटना है जो अबाध रूप से, हमारे जाने बिना, वर्ष के इस विशेष दिन घटती है । इस दिन हमारी अंतरात्मा अपने शरीर को पीछे छोड़ देती है और ऊपर, और ऊपर की ओर यात्रा करती है, यहां तक कि वह अपने मूल में जा मिले, ताकि अपने-आपको फिर से भर सके और अपने अंदर परम् प्रभु से उनकी शक्ति, ज्योति और उनके आनंद को आत्मसात् कर सके । फिर पूरे एक वर्ष तक काम चलाने के लिए नीचे उतर आती है । वर्ष पर वर्ष यही क्रम चलता रहता है । और इस प्रकार आंतरिक प्रकृति की दृष्टि से व्यक्ति को हर वर्ष अपने जन्मदिन पर किसी नई प्रगति में परम् प्रभु की सहायता पाने के लिये यह एक अच्छा अवसर होता है ।

यदि जन्मदिन का अनुसरण प्रगति और आत्म–विस्तार के साधन के रूप में किया जाये तो वह हमें अधिक महान् और अधिक पूर्ण जीवन की ओर ले जाता है । जो फिर समय आने पर अपने अंदर भगवान् की खोज, अपनी प्रकृति के रूपांतरण तथा भागवत् अभिव्यक्ति के लिए प्रवेश द्वार बन सकता है ।

श्रीअरविन्द कहते हैं – “तुम्हारा पहला लक्ष्य यही होना चाहिये कि तुम वासना मात्र से तथा अपने-आपको ही सर्वस्व मानने वाले अहंकार से सर्वथा मुक्त हो जाओ । तुम्हारा सारा जीवन भगवान के प्रति पुष्पांजलि और यज्ञाहुति हो । ताकि तुम अनुभव कर सको कि तुम सचमुच ही भगवती माता के शिशु हो, उन्हीं की चेतना और शक्ति के सनातन अंश हो । तुम्हारा सब कुछ सोचना-समझना, देखना, सुनना और कर्म करना, तुम्हारा श्वास-प्रश्वास और तुम्हारे अंग-प्रत्यंग का हिलना-डुलना भी उन्हीं से होता है, वे ही करती हैं । तुम उन्हीं की सत्ता से सत् हो, उन्हीं के चैतन्य से चित्त हो, उन्हीं के आनंद से आनंद हो।

श्री माँ  कहती है – तुम्हारा यह जन्मदिन तुम्हारे लिए अपने-आपको जरा अधिक और जरा ज्यादा अच्छी तरह भगवान् को देने का अवसर हो । तुम्हारा उत्सर्ग अधिक पूर्ण हो, तुम्हारी भक्ति अधिक प्रबल और अभीप्सा अधिक तीव्र हो । अपने-आपको नये प्रकाश की ओर खोलो और आनंद भरे कदमों से मार्ग पर चलो । इस दिन निश्चय करो कि ऐसा ही हो, और दिन व्यर्थ न जायेगा ।

तुम्हारे लिए जो नया वर्ष शुरू हो रहा है इसके साथ तुम्हें नया जीवन शुरू करना चाहिये,  इसमें फिर से एक नया दृढ़ निश्चय हो कि तुम अपनी चेतना और अपनी क्रिया में से उस सबको निकाल बाहर करोगे जो उसे कुरुप बनाता, छोटा करता, धुंधला बनाता और अंततः तुम्हारी प्रगति को रोक देता है और तुम्हारे स्वास्थ्य को बिगाड़ता है।अपने आंतरिक विकास के और पवित्रीकरण के प्रयास में विश्वस्त  रहो किमेरी शक्ति और मेरे आशीर्वाद तुम्हें सहारा देंगे ।

जन्मदिन पर श्री अरविन्द का आशीर्वचन

“नव जन्म को अपने हृदय में अभिव्यक्त होने दो और शांति तथा हर्ष में विकिरित होने दो, उसे अपनी सत्ता के समस्त अंगों को – मन एवं दृष्टि को, संकल्प शक्ति एवं भावनाओं को, प्राण एवं शरीर को अपने अधीन कर लेने दो । तुम्हारे जीवन में प्रत्येक दिन इसकी वृद्धि और आधिकारिक पूर्णता का दिन बनता जाये, जब तक कि तुम्हारी सत्ता में सब कुछ माँ का शिशु न बने । भागवत ज्योति, भागवत शक्ति, और भागवत उपस्थिति तुम्हें अपने अंदर समेटे रखे, तुम्हारी रक्षा करे, तुम्हारा पालन-पोषण करे, जब तक कि तुम्हारा आंतर एवं बाह्य जीवन पूर्णतया उसकी शांति, शक्ति तथा आनंद की एकमात्र गति एवं अभिव्यक्ति न बने ।”

जन्मदिवस पर श्री माँ के दिव्य संदेश

जन्म दिवस शुभ हो !

नव जन्म भी,एक नयी चेतना में जन्म हो जिसमें तुम समस्त छोटी-मोटी व्यक्तिगत प्रतिक्रियाओं के ऊपर हो जाओगे क्योंकि तुम हमेशा अपने हृदय में भगवान् की उपस्थिति का अनुभव करोगे,यह तुम्हें ऐसी शक्ति दे कि तुम समस्त बाधाओं, समस्त तुच्छता, समस्त कठिनाइयों को पार कर सको ।

मेरे प्रेम और आशीर्वाद सहित ।

8 जनवरी, 1963

तुम्हारी सत्ता की बहुत गहराईयों में, तुम्हारे वक्ष की गहराई में, ज्योतिर्मयी तथा शांत, प्रेम तथा प्रज्ञा से भरपूर भागवत उपस्थिति हमेशा मौजूद रहती है। वह वहां इसलिए है कि तुम उसके साथ तदात्म हो जाओ, कि वह तुम्हें एक ज्योतिर्मयी तथा दीप्त चेतना में रूपान्तरित कर दे।

हम तुम दोनों मिल कर तुम्हारी सत्ता की सतह के समस्त बाहरी शोर को शान्त करने की कोशिश करेंगे ताकि निश्चल-नीरवता तथा शान्ति में तुम इस आन्तरिक भव्यता के साथ एक हो सको।

तब वह दिवस तुम्हारे नूतन जन्म का दिवस बन जायेगा।इसे एक अवसर मानों और अंदर गहराई में जाओ और जागो,एक नयी, अधिक आलोकमयी और अधिक सच्ची चेतना में जन्म लो।“ भागवत कृपा हमेशा तुम्हारे साथ है।नीरव मन से अपने हृदय में एकाग्र होओऔर निश्चय ही तुम उस पथ-प्रदर्शन और सहायता को पा लोगे जिसके लिये तुम अभीप्सा करते हो। ”

“आज के दिनहम सत्य की विजय की ओरएक निर्णायक पग उठाने का निश्चय करते हैं।”यह वर्ष तुम्हारे लिए पूर्ण उद्घाटन और सीमाओं को तोड़ने का वर्ष हो।

२ फरवरी, १९४३

रत्ती-भर अभ्यास सिद्धान्तों के पहाड़ों के बराबर है।

“प्रभो, मेरे जन्म की वर्षगांठ पर वर दे कि मेरे अन्दर जानने की शक्ति  मुझे पूर्णतया रूपान्तरित करने की शक्ति में बदल जाये।”तुम्हारा जन्मदिन सचमुच एक नयी चेतना में तुम्हारा जन्म हो , उस सत्य चेतना में जो तुम्हें दिव्य उपलब्धि की ओर ले जाये ।इस वर्ष उनकी विजय की ओर एक निर्णायक कदम उठाया जाये ।आंतरिक जागरण के द्वारा ही, मानों नये क्षितिजों में अकस्मात् दरवाजे खुल जाते हैं – यह सचमुच ही एक अधिक वास्तविक, अधिक गंभीर और अधिक स्थायी चेतना का नवजन्म है ।यह निश्चय करना कि आगे से तुम अपने लिए नहीं, एकांतिक रूप से भगवान के लिए जीओगे ।इसे एक अवसर मानों और अपने अंदर गहराई में जाओ और जागो, एक नयी, अधिक आलोकमयी और अधिक सच्ची चेतना में जन्म लो ।भगवान के लिए जीने का अर्थ है कि तुम जो भी करो भगवान को अर्पित करते चलो और जो करो उससे व्यक्तिगत फल की कामना न करो ।व्यक्ति में हर वर्ष उस दिन एक विशेष ग्रहणशीलता होती हैं । अतः वह अपने पूर्ण विकास के मार्ग पर शुभ निश्चय और नई प्रगति करके इस ग्रहणशीलता का लाभ उठा सकता है ।यह वर्ष तुम्हारे लिए कार्य की ओर उत्सर्ग की पूर्णता का , सच्चाई , ऊर्जा और शांति की पूर्णता का वर्ष हो !आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति हर वर्ष अपने जन्मदिन पर अधिक ग्रहणशील होता है, अतः हर वर्ष किसी नयी प्रगति में उसकी सहायता करने के लिए यह बहुत अच्छा अवसर होता है ।भगवान के साथ सचेतन सायुज्य का एक क्षण सारे प्रतिरोध को छिन्न – भिन्न कर सकता है , चाहे वह कितना ही प्रबल क्यों न हो ।ऐसा हो कि यह वर्ष तुम्हारे लिए सभी परिस्थितियों में मुस्कुराने की शक्ति लाये, क्योंकि मुस्कान मुश्किलों पर इस तरह कार्य करती है, जिस तरह सूर्य बादलों पर वह उन्हें छितरा देता है ।हर बीतता हुआ वर्ष एक नयी विजय हो, और अनिवार्य रूप से होता है ।आज के दिन हम सत्य की विजय की ओर एक निर्णायक पग उठाने का निश्चय करते हैं ।

शुभ जन्मदिवस

मैं पूरे दिल के साथ तुम्हें अपनी बाँहों में भरती हूँ और तुम्हारी उच्चतम अभीप्सा की पूर्ति के लिये आशीर्वाद देती हूँ ।

३०-८-१९६३

शुभ जन्म दिन

 मेरे प्रिय बालक,

विश्वास रखो कि तुम जब कभी मुझे बुलाते हो तो मैं सुनती हूँ

और मेरी सहायता और मेरी शक्ति सीधी तुम्हारी ओर जाती है।

मेरे आशीर्वाद सहित ।

१-६-१९६०

शुभ जन्म दिन

गुलाबों (समर्पण) के गुच्छे के साथताकि तुम्हारी अभीप्सा चरितार्थ हो और तुम मेरे आदर्श बालक बन जाओ,अपनी अंतरात्मा और अपने जीवन में सच्चे लक्ष्य से अवगत रहो।

मेरे प्रेम और आशीर्वाद सहित।

३०-८-१९६४

यह वर्ष प्रगति और रूपान्तर का वर्ष हो- भागवत सिद्धि की ओर ले जाने वाला एक और पग।

२ फरवरी, १९३०

मेरे प्रिय बालक,

मेरा प्रेम और मेरे आशीर्वाद तुम्हारे साथ हैं और सारे साल रहेंगे।

ये तुम्हें भागवत लक्ष्य की ओर एक और प्रगति करने में सहायक हों।

श्री माँ के चरणों में प्रार्थना –

हे दिव्य माँ  ! आज जन्म-दिन पर अपने-आपको आपके परम् पावन श्रीचरणों में सौंपते हुए यही प्रार्थना है कि आज के दिन का एक-एक क्षण आपकी चेतना में रहे ।

वर दो माँ  कि मैं सदैव तुम्हारे प्रति सच्ची श्रद्धा, अभीप्सा, भक्ति, प्रेम तथा विश्वास रखते हुए आत्मोद्घाटन, परित्याग, समर्पण की तीव्रता द्वारा आंतरिक-प्रगति, अपनी प्रकृति के दिव्य-रूपांतरण तथा भागवत अभिव्यक्ति की ओर निरंतर अपने पग बढ़ा सकूँ ।