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When you have faith in God, you don't have to worry about the future. You just know it's all in His hands.
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केवल वही वर्ष जो व्यर्थ में गुजरते हैं,तुम्हें बूढ़ा बना देते हैं । वह वर्ष व्यर्थ जाता है जिसमें कोई प्रगति नहीं होती,चेतना की कोई वृद्धि नहीं होती,पूर्णता की ओर कोई पग नहीं उठाया जाता।
अपना जीवन किसी उच्चतर और वृहत्तर चीज की उपलब्धि की ओर निवेदित कर दो तो तुम्हें कभी गुजरते हुए वर्षों का भार अनुभव न होगा ।
तुम जितने वर्ष जिये हो उनकी संख्या तुम्हें बुढ़ा नहीं बनाती । तुम बुढ़े तब होते हो जब तुम प्रगति करना बंद कर देते हो ।
जैसे ही तुम्हें लगे कि तुम्हें जो कुछ करना था वह कर चुके, जैसे ही तुम अनुभव करो कि तुम्हें जो जानना था वह तुम जान चुके, जैसे ही तुम बैठकर अपने परिश्रम का फल भोगना चाहो और यह सोचो कि तुमने जीवन में काफी काम कर लिया तो तुम एकदम बुढ़े हो जाते हो और तुम्हारा क्षय शुरू हो जाता है ।
इसके विपरीत जब तुम्हें विश्वास हो कि जो जानना बाकी है उसकी तुलना में तुम जो जानते हो वह कुछ भी नहीं है, जब तुम्हें लगे कि तुमने जो कुछ किया है वह जो कुछ करना बाकी है उसका केवल आरंभ-बिंदु है, जब तुम भविष्य को उन अनंत सम्भावनाओं से भरे आकर्षक और चमकते सूर्य के रूप में देखो जिन्हें अभी पाना बाकी है, तब तुम युवा हो । जो हो, तुमने धरती पर बहुत-से वर्ष बिताये हैं, युवा और भावी कल की उपलब्धियों से समृद्ध होकर ।
और अगर तुम नहीं चाहते कि तुम्हारा शरीर तुम्हें धोखा दे तो व्यर्थ की उत्तेजना में अपनी शक्ति नष्ट करने से बचो । तुम जो भी करो, शांत, स्थिर और प्रकृतिस्थ होकर करो । शांति और नीरवता में अधिकतम शक्ति है ।
