दिव्य सन्देश

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When you have faith in God, you don't have to worry about the future. You just know it's all in His hands.

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देवबाला संघ एवं देवबाल संघ

आइयें , हम ध्यान दें ।

 बच्चों को दिया जा सकने वाला सर्वोत्तम उपहार होगा उसे अपने को जानना और अपना स्वामी बनना सिखाया जाये ।

अधिकांश माता-पिता विभिन्न कर्म से बच्चों की सच्ची शिक्षा के बारे में, जो बच्चों को दी जानी चाहिये, बहुत कम सोचते हैं l वे सोचते हैं कि जब वह एक बच्चे को संसार में ले आये, उसके लिए खाने-पीने की व्यवस्था कर दी, उसकी विविध भौतिक आवश्यकताओं को पूरा कर दिया और प्रायः कुछ अंश तक सावधानीपूर्वक उसके स्वास्थ्य की देखरेख कर दी तो उन्होंने पूरी तरह अपने कर्तव्य का निर्वाह कर दिया । बाद में, वे उसको विद्यालय में भेज देंगे और उसकी शिक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंप देंगे ।

दूसरे माता-पिता ऐसे हैं जो जानते हैं कि उनके बच्चों को शिक्षित होना चाहिये और जो इसके लिए यथाशक्ति प्रयास भी करते हैं । लेकिन बहुत कम माता-पिता — उनमें भी जो अत्यन्त गंभीर और सच्चे हैं – यह जानते हैं कि बच्चों को शिक्षित करने के योग्य होने का अर्थ है स्वयं को शिक्षित करना, स्वयं अपने प्रति सचेतन होना, अपना स्वामी बनना जिससे अपने बच्चों के सामने कभी बुरा उदाहरण पेश न करें । क्योंकि सबसे बढ़कर उदाहरण ही है, जिससे शिक्षा प्रभावित बनती है । जो कुछ सिखाया जाता है यदि कोई स्वयं इसका उदाहरण बच्चों के सामने न बन सके तो अच्छी वाणी बोलने और बुद्धिमानी का परामर्श देना बहुत कम प्रभाव डालता है ।

माता-पिता से –

(1) क्या आप चाहते हैं कि आपकी बालिका देवबाला या शक्ति स्वरूपा बनें ?

देवबाला संघ/देवबाल संघ में आकर अनुभव करेंगे –

  • आपके जीवन का धरती पर आने का उद्देश्य क्या है ?
  • आप कौन हैं ?
  • आपके अंदर कौन-सी दिव्य सत्ता विद्यमान है ?
  • दिव्य सत्ता की खोज के साधन क्या है ?
  • दिव्य सत्ता हमारा रूपान्तरण स्वयं कैसे करती है ?
  • दिव्य सत्ता हमें सर्वोच्च शिखर पर कैसे पहुंचाती है ?


भगवान ने हमें कौन-सा विशेष कार्य करने की शक्ति तथा क्षमता प्रदान की है, उस कार्य को उच्चतम चेतना में रहते हुए कैसे कर सकते है ?

जीवन में निराशा, अवसाद, भय, प्रतिस्पर्धा, राग, द्वेष, ईर्ष्या, लोभ, अहंकार जैसी निम्न प्रवृत्तियों से कैसे छुटकारा पा सकते हैं ? ज्ञान, शक्ति, प्रेम, सौंदर्य, एकता, आनंद तथा दिव्य जीवन को कैसे प्राप्त कर सकते हैं ? श्रीमाँ – श्री अरविन्द की शिक्षाओं का अध्ययन, चिंतन तथा पालन निश्चित ही आपके आंतरिक दिव्य रूपान्तरण तथा आपके अंदर आध्यात्मिक शक्ति को प्रकट करने में संपूर्ण रूप से सहायक सिद्ध होगा ।

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लक्ष्य -

प्रत्येक बालिका/बालक देव रूप है l प्रत्येक अपने अन्दर ईश्वर प्रदत्त अपनी क्षमता, प्रतिभा, मूल शक्ति को पहचाने, विकसित करें, अपना समग्र निर्माण करे तथा संपूर्ण मानवता के उत्थान के लिए अपना सर्वोच्च तथा सर्वोत्तम योगदान दे तथा नवीन उज्जवल विश्व के निर्माण के लिये एक विशाल भूमिका का निर्वहन करें ।

उद्देश्य -

 प्रत्येक बालक एवं युवा वर्ग अपने ‘आंतरिक देवत्व’ के प्रति जागरूक और सचेतन बनना सीखे । अपनी सत्ता के अंगों – शरीर, प्राण, मन, हृदय को समग्र रूप से विकसित करें । संसार में रहते हुए साधना द्वारा स्व- नियंत्रण तथा जीवन जीने की कला का विकास कर सके ।

     देवबाल संघ – देवबाला संघ की स्थापना इंदौर में सन् 1985 में श्रीमाँ-श्री अरविन्द के अनन्य भक्त दादाजी श्री डॉ. बी. एल. गुप्ता द्वारा की गई थी, तभी से यह संघ विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है ।

डॉ. सुमन कोचर
चेयरपर्सन
श्रीअरविन्द सोसायटी पुददुचेरी
शाखा इन्दौर