दिव्य सन्देश

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When you have faith in God, you don't have to worry about the future. You just know it's all in His hands. You just go to and do your best.

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प्राकृतिक जीवन शैली

प्रकृति – वस्तु

प्रकृति की प्रत्येक वस्तु,चाहे सजीव हो या निर्जीव, चाहे वह मनतः आत्म – सचेतन हो या आत्म – सचेतन न हो,अपनी सत्ता और अपनी क्रियाओं में एक अंतर्निवासी दृष्टि और शक्ति के द्वारा शासित होती है  ।

- दिव्य जीवन पृष्ठ 160

प्राकृतिक जीवन शैली, पंच तत्व उपचार एवं प्राकृतिक आहार

मानव मात्र प्रकृति की संतान हैं । मानव शरीर पांच तत्वों मिट्टी,जल,अग्नि,वायु और आकाश तत्व से बना हैं । इन्हीं पाँच तत्वों के प्रयोग से शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं इसे प्राकृतिक उपचार कहते हैंl

महत्तत्व
  • इन पांच तत्वों को चलाने वाला छठा तत्व ‘महत्तत्व’ है ।
  • इसी से पांचों तत्वों में गति है ।
  • उदाहरण के लिये पृथ्वी तत्व को लें ।  उसमें धारण करने की शक्ति इसी महत्तत्व की उपस्थिति के कारण हैlइसीलिए शरीर का स्तूप खड़ा हैं । अन्यथा यह ढह जाता ।
  • जल में स्निग्धता,अग्नि में उष्णता,वायु में संचरण शक्ति और आकाश में स्थिरता महत्तत्व या भागवत तत्व का परिणाम है ।
  • एक मुर्दे के ऊपर मिट्टी,जल,वायु,अग्नि आदि तत्वों का कोई असर नहीं होता ।
  • क्योंकि एक मुर्दे के ऊपर मिट्टी जल, वायु, अग्नि आदि तत्वों का कोई असर नहीं होता ।
  • क्योंकि उसमें महत्तत्व देह त्याग के साथ ही निकल जाता है ।
  • शरीर में रोगों का प्रवेश ‘मन’ के विचारों से होता है ।
  • मन से प्राण में जिसे हम जीवनी शक्ति कहते हैं उसमें आते है ।
  • प्राण से शरीर में प्रवेश करते है ।
  • इस तरह नकारात्मक, कमजोर,स्तरहीन विचारों से मनुष्य रोगी हो जाता है ।
सकारात्मक चिंतन
  • जो मनुष्य सकारात्मक चिंतन, विचारों और भावों में जीवन जीते हैं उनकी जीवनी शक्ति स्वस्थ और शक्तिशाली होती है ।
  • इसीलिये जरा भी रोग का आक्रमण होने पर यह स्वस्थ प्राण शक्ति शरीर को रोगों के आक्रमण से बचा लेती है ।
  • मनुष्य के जीवन में पहली आवश्यकता है – साधना !
  • प्रभु स्मरण,आराधना,उपासना या योग पथ पर चलकर शांति और समता में रहकर मनुष्य अपने अंदर साधना से दिव्य ऊर्जा का निर्माण कर जीवन को आध्यात्मिक बन सकता है ।

संयोजन : सुमन कोचर