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When you have faith in God, you don't have to worry about the future. You just know it's all in His hands. You just go to and do your best.
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नीचे उतरता हुआ त्रिकोण सत्, चित्, आनन्द का प्रतीक है।
ऊपर उठता हुआ त्रिकोण जीवन, ज्योति और प्रेम के रूप में अभीप्सा करते जड़-द्रव्य के उत्तर का प्रतीक है।
दोनों का संयोजन-बीच का समचतुष्कोण – है पूर्ण अभिव्यक्ति जिसके बीच में परम पुरुष का अवतार – कमल – है। समचतुष्कोण के अन्दर जल बहुलता का, सृष्टि का प्रतीक है।
‘श्रीमातृवाणी’, खण्ड १३, पृ. २९-३०
४ अप्रैल, १९५८
The descending triangle represents Sat-Chit-Ananda.
The ascending triangle represents the aspiring answer from matter under the form of life, light and love. The junction of both – the central square – is the perfect manifestation having at its centre the Avatar of the Supreme – the lotus.
The water – inside the square – represents the multiplicity, the creation.
CWM 13: 28-29
4 April 1958
श्रीअरविन्द का उद्देश्य किसी एक धर्म का विकास करना या प्राचीन धर्मों का सामंजस्य करना अथवा कोई नया धर्म प्रवर्तित करना नहीं है । क्योंकि इनमें से प्रत्येक केन्द्रीय ध्येय से अलग ले जानेवाला सिद्ध होगा। उनके पूर्ण योग का एकमात्र उद्देश्य है -एक ऐसा आंतरिक आत्म-विकास जिसके द्वारा इस योग का प्रत्येक साधक सभी में एक ही परम आत्मा का दर्शन कर सके और मानसिक स्तर से ऊपर की उस चेतना को उपलब्ध कर सके जो मानव प्रकृति को दिव्यता में रूपांतरित करने में समर्थ है ।
श्रीमाँ के अनुसार – “श्रीअरविन्द हमसे कहने आये थे कि “सत्य की उपलब्धि के लिये हमें धरती का त्याग करने की आवश्यकता नहीं, आत्मोपलब्धि के लिये हमें जीवन का त्याग करने की जरूरत नहीं है, भगवान से संबंध स्थापित करने के लिये हमें संसार छोड़ने या सीमित विश्वासों को लेकर चलने की आवश्यकता नहीं। भगवान सर्वत्र हैं, सबमें हैं, और यदि वे प्रच्छन्न हैं तो इसलिए कि हम उन्हें खोजने का प्रयास नहीं करते”।
समूची मानव जाति को श्रीअरविन्द एक ही महामंत्र है – “सारा जीवन ही योग है”।
